Tuesday, August 16, 2022

UP की 5 धर्म नगरियों से ग्राउंड रिपोर्ट:गोरखपुर वाले बोले- होंगे वो राम मंदिर के ठेकेदार, हमारे नहीं हैं; लेकिन बनारस में BJP का माहौल गर्म

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UP में छठे और सातवें चरण में धार्मिक नगरियों में वोटिंग होनी है। अयोध्या, मथुरा, प्रयागराज में चुनाव हो चुके हैं। अब काशी, गोरखपुर और मिर्जापुर की बारी है। वाराणसी में लोग काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद BJP का सपोर्ट कर रहे हैं तो गोरखपुर का चुनाव इंटरेस्टिंग हो गया है। यहां शहरी क्षेत्र में BJP की पकड़ मजबूत है, तो गांवों में साइकिल का बटन दबाने की बातें हो रही हैं।

UP की पॉलिटिक्स पर धर्म कितना असर डालता है, यह जानने के लिए हम 5 शहरों में पहुंचे। कई मंदिर, मठों, धर्मशालाओं में घूम-घूमकर पुजारियों से बात की। हमने यहां के लोगों की समस्याएं और यहां उनके चुनावी मुद्दे जाने हैं। आइए एक-एक करके इन शहरों की यात्रा पर चलते हैं।

धार्मिक नगरी 1: वाराणसी
‌‌वाराणसी में सुबह के 5 बजे थे। मठों, मंदिरों से घंटों और वैदिक मंत्रोच्चार की आवाजें आ रही हैं। उधर दशाश्वमेध घाट पर गंगा में डुबकी लगाने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। कुछ पंडे लोगों के माथे पर बिना पूछे चंदन लगाकर 10 रुपए मांग रहे हैं। दुकानों पर फ्री लॉकर, होटल बुकिंग के पोस्टरों के साथ सपा, भाजपा और कांग्रेस के चुनावी पर्चे भी चिपके दिखे। यहां हम पुराने वाराणसी की लगभग 35 से ज्यादा गलियों में चार घंटे तक घूमते रहे। कुल मिलाकर यहां BJP और सपा की सीधी टक्कर है। इसमें भाजपा सपा से 20 है।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर दिलाएगा भाजपा को बहुमत
वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाहर प्रसाद की दुकान पर हमें वीरेंद्र सिंह मिल गए। उन्होंने बताया, “2014 से PM मोदी ने वाराणसी के लिए बहुत कुछ किया है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बनने के बाद यहां के लोगों को रोजगार मिल रहा है। दुनिया भर में वाराणसी का नाम रोशन हुआ है। BJP ‌वाराणसी की सभी विधानसभा सीटों पर प्रचंड बहुमत से जीतेगी। प्रदेश का आंकड़ा 350 पार होगा।’’

संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों को नहीं मिलती सरकारी स्कॉलरशिप…
वाराणसी के केदारनाथ गोयनका वेद विद्यालय में हमें बच्चे मंत्रों का पाठ करते मिले। हाथ चलाते हुए इन बच्चों को संस्कृत के श्लोक पढ़ते देख काफी सुकून मिलता है। हमने यहां के आचार्य शेषनाथ तिवारी से बात की। उन्होंने बताया,”चाहे वह केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार दोनों ने ही संस्कृत विश्वविद्यालयों के बारे में नहीं सोचा। वाराणसी के छात्रों के लिए गुरुकुल परंपरा वाले छात्रावास की सुविधा बिल्कुल खत्म हो चुकी है। वैदिक शिक्षा लेने वाले बच्चों को सरकारी स्कॉलरशिप भी नहीं मिलती है।”

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