Tuesday, August 16, 2022

तमकुही राज… माता की मान्यता:चेरु राजा के तपस्या से प्रसन्न होकर जमीन से प्रकट हुई थी माता, झारही नदी के किनारे गुरवलिया के पास है स्थान

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झरही नदी के तट पर गुरवलिया में स्थित देवी माई का स्थान चमत्कारी शक्तियों के लिए प्रसिद्ध है। नवरात्र में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भक्त पहुंचकर पूजन-अर्चन करते हैं। माता स्थान के अतीत की कहानी बहुत ही गौरवशाली, अद्भुत व अध्यात्मिक है। दर्शन मात्र से मां प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण कर देती है।

जमीन से निकली माता
तमकुहीराज के पश्चिम दिशा से निकलने वाली झारही नदी के तट पर तमकुहीराज से लगभग 10 किमी. उत्तर दिशा में स्थित देवी माई मंदिर है। झरही के तट पर करीब 200 वर्ष पूर्व चेरु जाति के लोग निवास करते थे। मान्यता है कि इस घनघोर जंगल में चेरु जाति के राजा बैठकर देवी मां की उपासना करते थे। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर देवी मां भूगर्भ से पिंडी के रूप में प्रकट हुईं। उस समय चेरू राजा का कोई संतान नहीं थी, मां ने प्रसन्न होकर चेरु राजा को पुत्ररत्न प्राप्ति का आशीर्वाद दिया और अंतर्ध्यान हो गई। उस स्थान पर भूगर्भ से निकली सात पिंडियों का स्थान बन गया।

धर्मनाथ तिवारी बताते हैं कि 1950 के लगभग मां ने बागेश्वरी पाठक को स्वपन दिखाया कि मैं जंगलों के बीच में हूं। इसकी चर्चा बागेश्वरी पाठक ने दीना मद्धेशिया, भृगुन मद्धेशिया आदि लोगों से करते हुये जंगल में पहुंचकर पेड़ पौधों को काट कर साफ सफाई आदि करवाई।

माता को चुनरी, हलवा व पूड़ी चढ़ाते हैं भक्त
नवरात्र में भारी संख्या में भक्त माता के दर्शन करने के लिए पहुंच कर मत्था टेककर मन्नतें मांगते हैं तथा मन्नत पूरी होने पर माता के मंदिर पर पहुंचकर चढ़ावा के रूप में चुनरी व हलवा पूड़ी की प्रसाद चढाते हैं।

पूर्व प्रधान ने माता के स्थान का कराया सुंदरीकरण
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माता के स्थान पर सुंदरीकरण पूर्व प्रधान जयंत कुमार शाही ने कराया, जो आज काफी रमणीय स्थल के रूप में विकसित है। मंदिर के पुजारी रामकिशोर मिश्र ने बताया कि मां के दरबार में सच्चे दिल से पहुंचने वाले भक्तों की मनोकामना मां अवश्य पूरी होती हैं।

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